बनबसा। मानव तस्करी जैसे गंभीर सामाजिक अपराध की रोकथाम एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से सशस्त्र सीमा बल की 57वीं वाहिनी द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें प्रतिभागियों को मानव तस्करी की रोकथाम के गुर बताये गये।
कार्यशाला का शुभारंभ कमांडेंट, 57वीं वाहिनी मनोहर लाल ने किया। कार्यशाला के दौरान मानव तस्करी को एक संगठित अपराध के रूप में विस्तार से समझाया गया। इसके प्रमुख कारणों, खतरों तथा भारत में मानव तस्करी की वर्तमान स्थिति पर गहन चर्चा की गई। साथ ही मानव तस्करी से संबंधित भारतीय कानूनों, अंतरराष्ट्रीय कानूनों, एसएएआरसी की भूमिका तथा केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
इस अवसर पर उप कमांडेंट अनिल कुमार यादव व सहायक कमांडेंट दिनेश कुमार यादव के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा मानव तस्करी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर एसएसबी के कार्मिकों को आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसमें बल कर्मियों को पीड़ितों की पहचान, उनके बचाव, पुनर्वास तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः स्थापित करने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्राप्त हुआ। यह प्रशिक्षण भविष्य में एसएसबी के जवानों द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रभावी एवं संवेदनशील निर्वहन में सहायक सिद्ध होगा। कार्यशाला के दौरान सामाजिक संस्थाओं एवं एनजीओ की भूमिका, पुलिस एवं न्यायपालिका के योगदान, तथा मानव तस्करी की रोकथाम में सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष बल दिया गया। कार्यशाला का द्वितीय दिवस मानव तस्करों की कार्यप्रणाली, उनके नेटवर्क, संपर्क सूत्रों तथा विशेष रूप से भारत–नेपाल सीमा पर मानव तस्करी से संबंधित मामलों पर केंद्रित रहा। कार्यशाला के दूसरे दिन उप महानिरीक्षक, क्षेत्रक मुख्यालय पीलीभीत अनिल कुमार शर्मा ने दो दिवसीय कार्यशाला का विधिवत समापन किया। उन्होंने वक्ताओं द्वारा प्रदान की गई महत्वपूर्ण जानकारियों पर प्रकाश डालते हुए इन्हें एसएसबी कार्मिकों के दैनिक कर्तव्य निर्वहन में अत्यंत उपयोगी बताया। कार्यशाला में 57वीं वाहिनी सितारगंज व 49वीं वाहिनी पीलीभीत के 40 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उप निरीक्षक ब्रिजपाल सिंह सहित अनेक अधिकारी व कार्मिक उपस्थित रहे।







